Suryabhedi Pranayama In Hindi Complete Guide

Suryabhedi Pranayama In Hindi Complete Guide अष्टांग योग में वर्णित सूर्यभेदी प्राणायाम हमारे शरीर को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।  इस प्राणायाम के द्वारा शरीर में स्थित पिंगला नाड़ी को जगाया जाता है ,पिंगला नाड़ी को सूर्य स्वर भी कहा जाता है। इसका ये नाम सूर्य की शक्ति और गर्मी को दर्शाता है। ये पिंगला या सूर्य नाड़ी हमारे नाक के दाहिने छिद्र में स्थित होती है। Suryabhedi Pranayama In Hindi का अभ्यास करते समय नाक की दाहिने स्वर से श्वास लिया जाता है।



Suryabhedi Pranayama In Hindi - सूर्य भेदी प्राणायाम विधि 

Suryabhedi Pranayama In Hindi - सूर्य भेदी प्राणायाम विधि
Suryabhedi Pranayama



  • Suryabhedi Pranayama Steps 

  1. Suryabhedi Pranayama करने के लिए किसी स्वच्छ स्थान को चुने। 
  2. सबसे पहले किसी ध्यानात्मक आसन जैसे पद्मासन या सुखासन में बैठ जाए। 
  3. अपने मेरुदंड (रीढ़ की हड्डी ) को सीधा रखे और कंधों को तनावरहित (रिलैक्स) करे। 
  4. अब मध्यमा और अनामिका उंगली को मिलाकर नाक के बाएं छिद्र को  बंद करे।
  5.  और नाक के दाहिने छिद्र लंबी और गहरी श्वास ले और कुंभक करे ( श्वास को रोके ) इस समय सूर्य के तेजोमय स्वरुप का ध्यान करना चाहिए।
  6.  कुछ देर श्वास को रोककर रखने के बाद ,नाक के बाए छिद्र से श्वास को बाहर छोड़ दे। 
  7. ध्यान दे की Suryabhedi Pranayama में केवल दाहिने नासिका से ही श्वास लिया जाता है ,किसी भी स्थिति में बाए छिद्र से श्वास ना ले।
  8.  इसी क्रिया को ३ से लेकर ५ बार करे और बढाकर १० तक ले जाएँ।






Amazing Health Benefits Of Suryabhedi Pranayama - सूर्य भेदी प्राणायाम के लाभ 

Amazing Health Benefits Of Suryabhedi Pranayama - सूर्य भेदी प्राणायाम के लाभ
Suryabhedi Pranayama Benefits 


  1. Suryabhedi Pranayama Practice से  सूर्य नाड़ी को प्रभावित किया जाता है ,जो हमारे शरीर में उष्मा और पित्त में बढ़ोतरी करती है।
  2.  नियमित Suryabhedi Pranayama Steps करने से शरीर तेजस्वी और चमकदार बनता है। 
  3. यह वात और कफ से उत्पन्न होनेवाले रोगों को दूर करने में सक्षम है। 
  4. रोजाना Suryabhedi Pranayama करने से त्वचा चमकदार होकर झुर्रियां ख़त्म हो जाती है।
  5.  यह Pranayama बुढ़ापे को जल्दी नहीं आने देता तथा चेहरे की रौनक को बढ़ाता है।
  6.  नियमित रूप से अनुलोम विलोम प्राणायाम के बाद Suryabhedi Pranayama करना चाहिए।
  7.  कुंभक (श्वास रोकने की क्रिया ) के बिना अगर इस Pranayama को किया जाए तो ये ह्रदय की गति और शरीर की कार्यक्षमता को बढ़ाकर वजन कम करने में सहायक सिद्ध होता है।
  8.  नित्य Suryabhedi Pranayama Steps को करने से उदर कृमि , पेट के कीड़े ,कोड ,त्वचाविकार ,सांसर्गिक रोग इत्यादि रोगों को दूर करता है।
  9.  मासिक धर्म में अनियमितता और समस्त स्त्री रोगों के लिये Suryabhedi Pranayama अत्यंत फायदेमंद है।
  10.  मधुमेह जैसे रोग को भी Suryabhedi Pranayama Practice के द्वारा ठीक किया जा सकता है। 
  11. जिन लोगों का रक्तचाप एकदम निचे रहता है Low B.P. उनके लिए भी ये Suryabhedi Pranayama लाभदायी है।
  12. ये सभी Benefits Of Suryabhedi Pranayama  है। जो आपको नियमित रूप से Suryabhedi Pranayama Practice से प्राप्त होते है। 


 Precautions For Suryabhedi Pranayama - सूर्यभेदी प्राणायाम में सावधानी 


  1. Suryabhedi Pranayama Pracice उच्च रक्तचाप High B.P. और ह्रदय रोगियों को नहीं करना चाहिए। 
  2. साथ ही जिन्हे श्वसन विकार ,दमा ,अस्थमा है उन्हें Suryabhedi Pranayama Steps करते समय कुंभक  (श्वास को रोकना ) नहीं करना चाहिए।
  3.  जिन्हे अत्यधिक गर्मी की शिकायत रहती है ,उन्हें भी Suryabhedi Pranayama से बचना चाहिये।  
  4. गर्मियों के मौसम में Surya bhedi Pranayama का कम से कम अभ्यास करना चाहिए।
  5.  ह्रदय और अन्य गंभीर रोगों से ग्रसित होनेपर डॉक्टर की सलाह लेकर ही Suryabhedi Pranayama का अभ्यास करे।


कौन सोच सकता है की इतना सरल प्राणायाम का अभ्यास करके हम इतने सारे लाभ प्राप्त कर सकते है। आशा है की आपको "Suryabhedi Pranayama In Hindi " से उपयुक्त जानकारी मिल गयी होगी। फिर भी कुछ पूछना चाहते है तो आप कमेंट कर के पूछ सकते है। 
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