Anulom Vilom Pranayama In Hindi Complete Guide

Anulom Vilom Pranayama  In Hindi Complete Guide अनुलोम विलोम प्राणायाम श्वासों के माध्यम से प्राकृतिक रूप से शरीर को स्वस्थ करता है। अष्टांग योग में प्राण को विशेष महत्व दिया गया है। प्राणायाम के अभ्यास से ही व्यक्ति का तन और मन स्वस्थ और शुद्ध बना रहता है। यही कारण है की आजकल हर कोई प्राणायाम के अभ्यास से लाभ प्राप्त कर रहा है। परंतु प्राणायाम तभी हमारे लिए उपयोगी साबित होगा जब हम इसे सही ढंग से करे। गलत ढंग से किया गया कोई भी कार्य लाभ की जगह पर हानि पहुंचाता है। साधारण सा प्रतीत होने वाला अनुलोम विलोम प्राणायाम हमारे शरीर और आत्मा के लिए बेहत ही फायदेमंद है। आज मैं आपको Anulom Vilom Pranayama  In Hindi की संपूर्ण जानकारी देने जा रहे है ,इसलिए इसे ध्यान से पढ़े।


Anulom Vilom Pranayama  In Hindi - अनुलोम विलोम प्राणायाम 

Anulom Vilom Pranayama In Hindi - अनुलोम विलोम प्राणायाम
Anulom Vilom Pranayama 


  • Anulom Vilom Pranayama Steps 




  1. Anulom Vilom Pranayama करने के लिए सबसे पहले किसी शांत और स्वच्छ जगह का चुनाव करे। जिससे प्राणायाम करते समय ध्यान आसानी से लगने लगे और धारणा शक्ति को बल मिले। 
  2. सबसे पहले निचे चटाई बिछाकर किसी भी ध्यानात्मक आसन में बैठ जाए, जैसे पद्मासन ,सुखासन इत्यादि। 
  3. अपनी आँखे बंद करे और कमर को सीधा रखे। अपने दोनों हाथों को अपने घुटनों पर आराम करने दे। 
  4. अब अपना दाहिना हाथ उठाकर अंगूठे से नाक के दाए छिद्र को बंद करे ,और बाएं छिद्र से लंबी और गहरी श्वास ले। 
  5. जब आप श्वास को अंदर लेते है ,तो उसे रोकने का प्रयत्न ना करे। तुरंत अपनी मध्यमा और अनामिका उंगली से अपने बाए छिद्र को बंद करे और दाहिने छिद्र से श्वास को बाहर जाने दे। 
  6. अपने बाएं छिद्र को दबा ही रहने दे और दाहिने नासिका से ही श्वास को अंदर ले ,और बाएं नासिका से बाहर छोड़ दे, ये Anulom Vilom Pranayama की एक आवृति पूर्ण हुयी। 
  7. अब इसी क्रिया को दोहराते जाए। बाएं से श्वास ले और दाएं से छोड़ दे ,फिर दाएं से श्वास ले और बाए से छोड़ दे।
  8.  देखिये यहापर ध्यान इस बात पर देना चाहिए की जिस छिद्र से आप श्वास को बाहर छोड़ते है ,ठीक उसी नासिका से आपको श्वास अंदर लेनी है। 
  9. शुरुवात में Anulom Vilom Pranayama Steps ३ से ५ मिनट तक ही करे, फिर अभ्यासानुसार समय को १० मिनट तक लेकर जाए।
  10.  गर्मियों के मौसम में Anulom Vilom Pranayama को ३ से ५ मिनट ही करे,इससे ज्यादा नहीं ।


  •  Know The Nerves Before You Doing Anulom Vilom Pranayama - स्वरों को जाने

  1. Anulom Vilom Pranayama Steps करने से पहले आपको स्वरों को जानना आवश्यक है ,जिससे आप सरलता से इस प्राणायाम को कर पाएंगे। 
  2. हमारा शरीर अनगिनत नाड़ियों से भरा पड़ा है ,परंतु  इन सभी नाड़ियों में से तीन प्रमुख नाड़ियां है ,जो शरीर के संचालन में हमारी मदद करती है। जब तक ये नाड़ियाँ सुचारु ढंग से चलती है ,तबतक मनुष्य स्वस्थ और आनंदी जीवन व्यतीत करता है। 
  3. पर अगर किसी कारण से ये नाड़ियां अपना कार्य बंद करने लगे ,तो हमारा शरीर विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त हो जाता है। 
  4. सामान्य मनुष्य की हर समय इन तीनों नाड़ियों में से केवल एक नाड़ी कार्य करती है। इन नाड़ियों का अनुभव हम अपने नाक के अग्र भाग पर कर सकते है।
  5.  इन तीनों नाड़ियों के नाम क्रमशः इड़ा , सुषुम्ना और पिंगला है। मनुष्य के नाक के बाएं छिद्र से जो श्वास चलती है उसे इड़ा नाड़ी कहाँ जाता है ,क्योंकि इस नाड़ी से हमे शीतलता मिलती है ,इसलिए इस नाड़ी को चंद्र नाड़ी भी कहते है।
  6.  और दाएं छिद्र से चलनेवाली श्वास को पिंगला या सूर्यनाडी के नाम से भी जाना जाता है।। इन दोनों के बिच में तीसरी नाड़ी प्रवाहित होती रहती है ,जिसे सुषम्ना कहा जाता है। 
  7. जब व्यक्ति योगसाधना से अपनी कुंडलिनी को जागृत कर लेता है ,तभी उसकी सुषम्ना कार्य करने लगती है। सामान्य अवस्था में तो व्यक्ति की इड़ा और पिंगला नाड़ी ही चलती है।



  • Things To Know Before You Are Doing Anulom Vilom Pranayama -  ध्यान रखने योग्य बाते

  1. किसी भी Pranayama का अभ्यास खाली पेट करना ,आपके कई रोगों को दूर कर देता है। 
  2. Anulom Vilom Pranayama Steps करने से पहले भी आपका पेट और आतें खाली होनी चाहिए।
  3.  सुबह सूर्योदय का समय Anulom Vilom Pranayama करने के लिए बहुत ही उपयुक्त होता है।
  4.  अगर आप इसका अभ्यास शाम को करना चाहते है ,तो भोजन और अभ्यास में ५ से ६ घंटे का समय रखना आवश्यक है। 
  5. अगर आप Pranayama के साथ योगासनों का अभ्यास करते है ,तो योगासनों का अभ्यास हो जानेपर प्राणायाम की शुरुवात करे।



Amazing Health Benefits Of Anulom Vilom Pranayama - अनुलोम विलोम प्राणायाम के रोगों में लाभ

Amazing Health Benefits Of Anulom Vilom Pranayama - अनुलोम विलोम प्राणायाम के रोगों में लाभ
Health Benefits Of Anulom Vilom Pranayam

  1. Anulom Vilom Pranayama Steps से शरीर में स्थित ७२ कोटि ७२ लाख १० हजार २१० नाड़ियों का संपूर्ण शुद्धिकरण हो जाता है।
  2.  जिससे शरीर बलिष्ठ ,तेजस्वी और स्वस्थ बना रहता है। Anulom Vilom Pranayama के नियमित अभ्यास से कंपवात, संधिवात,आमवात ,मांसपेशियों में दुर्बलता इत्यादि वातरोग दूर हो जाते है।
  3.  यह मूत्ररोग ,धातुरोग ,शुक्रक्षय,अम्लपित्त ,वीर्य विकार इत्यादि पित्तरोगों में लाभदायक है।
  4.  Anulom Vilom त्रिदोषों का शमन कर देता है ,वात और पित्त रोगों के साथ साथ ये सर्दी खांसी ,दमा ,अस्थमा ,सायनस,कफ रोग ,गले के रोग ,टॉन्सिल्स ,थॉयरॉइड जैसे कफ रोगों को भी दूर करता है। 
  5. इसका अभ्यास खून को स्वच्छ करता है तथा शुद्ध प्राणवायु को खून में संचारित करता है।
  6.  ये फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाकर छाती का विकास करता है ,ह्रदय के अंदर बन रहे ब्लोकेजेस (रुकावटों) को दूर करता है।
  7.  वैज्ञानिकों के अनुसार Anulom Vilom Pranayama Steps ३ से ४ महीने ,नियमित रूप से करने से ये ब्लोकेजेस ४०% तक दूर हो जाते है।
  8.  मोटापे से ग्रसित व्यक्तियों को नियमित रूप Anulom Vilom करना चाहिए ,इससे कोलेस्टेरॉल ,ट्राइग्लिसराइड्स ,H.D.L / L.D.L लेवल को संतुलित रखता है ,जिससे आप हमेशा स्वस्थ जीवन का अनुभव करेंगे।
  9. नित्य Anulom Vilom Pranayama Practice से जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलता है। 
  10. Anulom Vilom का अभ्यास मूलाधार चक्र में स्थित कुंडलिनी को उर्ध्व बनाता है ,जो कुंडलिनी जागरण का पहला चरण है। 
  11. यह दिमाग को शांत बनाये रखता है तथा काम ,क्रोध आदि विकारों को संयमित रखने में मदद करता है। 
  12. नियमित Anulom Vilom Pranayama का अभ्यास साधक में उत्साह ,धैर्य ,आनंद ,निर्भयता और शांति का जागरण करता है।
  13. ये सभी Benefits Of Anulom Vilom Pranayama है। जिसे आप नियमित Anulom Vilom Pranayama Practice से प्राप्त कर सकते है। 




  • Anulom Vilom Pranayama करते समय मन में कौनसा संकल्प ले ?



  1. Anulom Vilom Pranayama Steps करते समय मन में संकल्प रखना चाहिए की मेरी इड़ा और पिंगला दोनों नाड़ियों में श्वास प्रवाहित हो रही है ,और मेरी सुषुम्ना नाड़ी जागृत हो रही है।
  2. मेरे शरीर में स्थित षट्चक्र जागृत होते जा रहे है ,और मेरी ऊर्जा इन षट्चक्रों को भेद रही है। 
  3. ब्रम्हांड में विचरण कर रही, समस्त सकारात्मक शक्तियों से मेरा शरीर तेजोमय हो रहा है ,और सर्वशक्तिमान परमात्मा मेरे ऊपर अपनी शक्तियों का वर्षाव कर रहा है।
  4. इसप्रकार धारणा रखकर अपने आप को शांत ,आनंदी और तनावरहित महसूस करे।





Precautions For Anulom Vilom Pranayama - अनुलोम विलोम प्राणायाम में सावधानी 


  1. Anulom Vilom Pranayama Steps आप मंद ,मध्यम और तीव्र गतिसे अपनी शक्तिनुसार कर सकते है। 
  2. शुरुवाती समय में Anulom Vilom Pranayama का अभ्यास मध्यम गतिसे करना ही उपयुक्त होता है। जैसे ही आपका अभ्यास होता जाएगा ,वैसे वैसे आप श्वास की गति को बढ़ा सकते है।
  3. Anulom Vilom Pranayama Practice ज्यादा से ज्यादा १५ से २० मिनट तक करना चाहिए ,इससे अधिक समय तक इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  4. अगर आप पहले से किसे बीमारि से ग्रसित है ,तो चिकित्स्कीय (डॉक्टर) सलाह लेकर मंद गतिसे Anulom Vilom Pranayam का अभ्यास करे। 
  5. अनुलोम विलोम का अभ्यास करते समय मानसिक रूप से ॐ का चिंतन करना आपको अधिक सकारात्मक परिणाम देता है। 
  6. ५ मिनट तक Anulom Vilom का अभ्यास मूलाधार चक्र में स्थित कुंडलिनी को उर्ध्व बनाता है।

अनुलोम विलोम एक बेहतरीन प्राणायाम है। अपने दैनिक व्यायामों में इस प्राणायाम को सम्मेलित करना ,आपके लिए एक अच्छा अनुभव साबित हो सकता है। "Anulom Vilom Pranayama In Hindi"  संबंधित कोई सवाल हो तो आप कमेंट कर के पूछ सकते है। 

    
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